W7s news गुवाहाटी--- फैंसी बाजार एमएस रोड स्थित श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय में वास्तु शास्त्र एक विज्ञान विषय पर परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें सूरत से पधारे विशिष्ट वास्तुविद देवकीनंदन देवड़ा ने वास्तु शास्त्र संबंधी कई रहस्य को बताते हुए दर्शक दीर्घा में बैठे दर्शकों के सवालों का जवाब भी दिया। इससे पहले कार्यक्रम संयोजक संपत मिश्र ने मंत्रोच्चारण कर सरस्वती वंदना के पश्चात वास्तु विद देवकीनंदन देवड़ा का परिचय पाठ किया। पुस्तकालय के अध्यक्ष विनोद रिंगनिया ने स्वागत भाषण देते हुए पुस्तकालय के भविष्य के नीति निर्धारण के बारे में भी जानकारी दी। इस अवसर पर वास्तु शास्त्री श्री देवड़ा के अलावा उनकी धर्मपत्नी लैंडमार्क वर्ल्ड वाइस एजुकेशन की इंट्रोडक्शन लीडर शारदा देवड़ा का भी फूलाम गमछा से अभिनंदन किया। श्री देवडा ने वास्तु शास्त्र के बारे में बोलते हुए कहा कि वस्तु डराता नहीं है बल्कि वास्तु शक्ति देता है। वास्तु पंच तत्व पर आधारित है। इन पंच तत्वों के ताल मेल से ही सुख शांति मिलती है। वास्तु का विज्ञान से भी संबंध है। जैसे दक्षिण पूर्व में रसोई घर होना चाहिए। इसका वैज्ञानिक कारण यह है की खाना बनाते समय पौष्टिक खाना बनाना चाहिए। यह सभी जानते हैं। यह पौष्टिक खाना तभी बनता है जब दक्षिण पूर्व में रसोई होती है और सूर्य उदय होते ही उसकी रोशनी खिड़की के माध्यम से खाद्य अन्न पर पड़ती है। खाद्य पर उगते सूर्य की रोशनी से उसमें विद्यमान छोटे-छोटे कीड़े मकोड़े निकलकर बाहर भाग जाते हैं। साथ ही अनाज पर रोशनी पडने से अनाज में पौष्टिकता आ जाती है। दक्षिण पश्चिम कोना को वास्तु शास्त्र में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका वैज्ञानिक कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत के दक्षिण पश्चिम कोने में मुंबई महानगर बसा हुआ है। जो भारत की आर्थिक राजधानी भी है तथा विश्व के सभी बड़े-बड़े औद्योगिक घराने इसी मुंबई क्षेत्र के आसपास फल फूल रहे हैं। दुनिया के नक्शे में भी दक्षिण पश्चिम में अमेरिका है। जो आज अपने नेतृत्व में पूरी दुनिया में राज करता है। भारतवर्ष के उत्तर पूर्व में असम की भूमि है। जो ईशान कोण में अवस्थित है। पंचतत्व का जल तत्व उत्तर पूर्व में ही रहता है । उत्तर पूर्व को हरा रखना चाहिए। जिसमें जल तत्व सहायक होता है। असम के हरे भरे चाय बागान इस जल तत्व के संतुलन को बनाकर रखता है। भारत के प्रधानमंत्री भी इस ईशान कोण को मजबूत करने में लगे हुए हैं। क्योंकि ईशान कोण मजबूत होते ही भारत मजबूत होगा और चारों ओर खुशहाली आ जाती है। ईशान को मजबूत होने के चलते ही आहोम ने असम पर 600 साल तक राज किया और मुगलों से लड़ते रहे। मगर मुगल कभी भी असम में राज न कर सके।उस समय भी वास्तु शास्त्र को आहोम राजाओं ने प्राथमिकता दी थी। इस अवसर पर दर्शकों ने वास्तु संबंधी कई सवाल पूछ कर अपनी शंकाओं का निवारण किया । कार्यक्रम में मारवाड़ी पुस्तकालय ट्रस्ट के नारायण खाखोलीया,स्मारिका संपादक अंशु शारदा, सरोज बी जालान,सविता जोशी लक्ष्मीपत वेद, लायंस क्लब गुवाहाटी के अध्यक्ष राजेश हंसारियां, श्रवण सरावगी, प्रेम अग्रवाल ,मारवाड़ी सम्मेलन मेट्रो शाखा के अध्यक्ष अमित कंसल, पुस्तकालय के सदस्य तथा कल्याण आश्रम महानगर के सचिव प्रेमचंद खजांची, हरिप्रसाद गोयंका के अलावा अन्य कहीं व्यक्ति उपस्थित थे।
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