गुवाहाटी में जुटे 500 से अधिक प्रतिनिधि, सरसों तेल के उत्पादन से खपत तक पर हुआ मंथन
W7s news,,गुवाहाटी, 21 सितंबर। देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में पूर्वोत्तर के गुवाहाटी में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संवाद आयोजित किया गया। नेशनल एडिबल ऑयल प्रमोशन एसोसिएशन (नेपा) की ओर से हालहि में सोनापुर के मेफेयर स्प्रिंग वैली रिसॉर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रीय खाद्य तेल सम्मेलन ‘सम्पर्क 2026’ का आयोजन किया गया, जो पूर्वोत्तर में पहली बार हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत असम के प्रख्यात गायक जुबिन गर्ग की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित ‘जुबिन दिवस’ के तहत उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। इसके पश्चात कार्यक्रम की औपचारिक कार्यवाही शुरू हुई।
दो दिवसीय सम्मेलन में 500 से अधिक प्रतिनिधियों तथा खाद्य तेल उद्योग से जुड़े विभिन्न वर्गों के हितधारकों ने भाग लिया और उद्योग के वर्तमान परिदृश्य, चुनौतियों, संभावनाओं तथा भविष्य की दिशा पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
‘सम्पर्क 2026’ का मुख्य केंद्र सरसों तेल को प्रोत्साहित करना तथा खाद्य तेल के क्षेत्र में भारत को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासों को गति देना रहा। सम्मेलन में खेत से लेकर उपभोक्ता तक खाद्य तेल की पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े किसान, प्रसंस्करणकर्ता, व्यापारी, वितरक, उद्योग प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारक एक मंच पर एकत्रित हुए। इस दौरान उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, उपभोक्ता जागरूकता और खपत से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
सम्मेलन में किसान स्तर पर सरसों की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि देश में सरसों का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं के बीच सरसों तेल के गुणों, उपयोगिता और इसके सेवन को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है। चर्चा के दौरान घरेलू खाद्य तेल उत्पादन को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी विचार किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश में एक मजबूत, टिकाऊ और प्रभावी घरेलू खाद्य तेल व्यवस्था विकसित करने के लिए उद्योग के विभिन्न वर्गों के बीच बेहतर समन्वय, संवाद और सहयोग जरूरी है। किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं, व्यापारियों, वितरकों, उद्योग संगठनों तथा उपभोक्ताओं के बीच मजबूत संपर्क को खाद्य तेल क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
सम्मेलन के दौरान खाद्य तेल उद्योग से जुड़े विभिन्न उत्पादों एवं गतिविधियों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। प्रदर्शनी के स्टॉलों का उद्घाटन श्री बिस्वजीत पेगू, भा.प्र.से., निदेशक, जनगणना विभाग द्वारा किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से सम्मेलन में पहुंचे प्रतिनिधियों को खाद्य तेल उद्योग की विभिन्न गतिविधियों और संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर मिला। इस अवसर पर ‘सम्पर्क 2026’ की विशेष स्मारिका का भी विमोचन किया गया, जिसमें खाद्य तेल उद्योग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों, विभिन्न विचारों, उद्योग की चुनौतियों तथा सम्मेलन के उद्देश्यों और भविष्य की दृष्टि को समाहित किया गया है।
सम्मेलन में खाद्य तेल उद्योग एवं संबंधित क्षेत्रों की अनेक प्रमुख हस्तियों ने सहभागिता की। इनमें विशिष्ट अतिथि श्री अंग्शु मलिक, श्री संजीव गिरि, श्री सुधाकर राव देसाई, श्री संजीव अस्थाना, श्री अतुल चतुर्वेदी, श्री अजय झुनझुनवाला तथा डॉ. ए.आर. शर्मा सहित अनेक विशिष्ट अतिथि एवं उद्योग जगत के प्रमुख वक्ता शामिल रहे। वक्ताओं ने खाद्य तेल उद्योग के सामने मौजूद विभिन्न अवसरों और चुनौतियों पर अपने विचार रखे तथा घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने, किसानों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण खाद्य तेल पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
‘सम्पर्क 2026’ के सफल आयोजन का नेतृत्व एनईपीए की मुख्य टीम ने किया। इसमें श्री कैलाश कबरा, अध्यक्ष; श्री नीरज बोथरा, सचिव; श्री प्रकाश कबरा, कोषाध्यक्ष; श्री दिनेश राठी, संयुक्त सचिव; श्री गौतम देवड़ा, संयुक्त कोषाध्यक्ष तथा श्री प्रवीण कोठारी, संपादक शामिल रहे। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिनिधियों के बीच संवाद और विचारों का व्यापक आदान-प्रदान हुआ। सम्मेलन ने खाद्य तेल उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े विभिन्न घटकों को एक साझा मंच प्रदान करते हुए आपसी संपर्क, सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का अवसर दिया।
‘सम्पर्क 2026’ के माध्यम से एनईपीए ने खाद्य तेल उद्योग से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक राष्ट्रीय मंच तैयार किया। सम्मेलन में सरसों तेल का प्रोत्साहन, घरेलू खाद्य तेल उत्पादन को बढ़ाना तथा खाद्य तेल के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को उद्योग के भविष्य से जुड़े प्रमुख विषयों के रूप में प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

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